विज्ञान की दृष्टि से जैविक व्यवहार की विशेषताएँ अद्भुत और रहस्यमय हैं। एक छोटे से बच्चे की कहानी हमें इस दिशा में विचार करने का अवसर देती है, जो अपने चारों ओर की दुनिया का निरीक्षण करते हुए, उस अद्भुत पैटर्न में घूम रहा है, जो उनके कदमों के नीचे उपस्थित है
छोटे बच्चों में द्विभाजन और वर्गीकरण की प्रवृत्ति होती है, जो उनकी प्राकृतिक जिज्ञासा और सृजनात्मकता को प्रकट करती है। जैसे कि इस छोटे बच्चे द्वारा देखी जा रही संगमरमर की सड़कों में आकृतियाँ हैं, वह एक खेल के माध्यम से अपने आप को उन संरचनाओं से जोड़ता है। यह बच्चे की न्यूरोलॉजिकल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके चलने का तरीका न केवल शारीरिक अभ्यास है, बल्कि उनके मन में विचारों और धारणाओं का एक जाल भी रचता है।
दिलचस्प है कि शोधों से यह पता चलता है कि जब बच्चे अपने परिवेश के साथ इस तरह की इंटरएक्शन करते हैं, तो वे नए अनुभवों को ग्रहण करते हैं जो उनके समग्र विकास के लिए अनिवार्य हैं। प्रायः, बच्चों की ये गतिविधियाँ आत्म-शिक्षण का हिस्सा होती हैं; उनके मन में सवाल उठते हैं और वे उत्तर खोजने की कोशिश करते हैं।
यद्यपि यह एक सामान्य दृश्य प्रतीत होता है, परंतु ऐसे क्षणों में हमारे चारों ओर के स्वाभाविक पैटर्न हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि हम अपने अनुभवों में कितना कुछ सिख सकते हैं। हर दिन, एक बच्चा अधिकतर समय अपने चारों ओर के वातावरण का अवलोकन करके, स्वयं को नए तरीकों से समझता है। यह चीज़ हमें यह याद दिलाती है कि जीवन के छोटे-छोटे अनुभव भी सामूहिक रूप से हमारी सोच और विकास में महत्वपूर्ण साबित होते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, ऐसे रोज़मर्रा के अनुभवों में निरंतरता और परिवर्तन का अनुपात ७०% से अधिक होता है।