माँ और बच्चे के बीच के संबंध को देखकर यह स्पष्ट होता है कि जैविक व्यवहार कितना आकर्षक और जटिल हो सकता है। इस छवि में एक बच्चा अपनी माँ को गले लगाते हुए और चाँद जैसी मुस्कान के साथ उसके गाल पर किस करते हुए नजर आ रहा है। यह सरल लेकिन गहरे अर्थ वाले क्षण भावन
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, माता-पिता और बच्चों के बीच का यह व्यवहार केवल प्यार का प्रदर्शन नहीं है; यह विकासात्मक मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। शोधों से यह पता चला है कि इस प्रकार की शारीरिक निकटता बच्चों में ऑक्सीटॉसीन नामक हार्मोन के स्तर को बढ़ाती है, जो न केवल सुखद अनुभूतियों को बढ़ाता है, बल्कि सामाजिक जुड़ाव और सुरक्षा की भावना को भी प्रोत्साहित करता है। यह एक चक्रवात की तरह है: जब माता-पिता अपने बच्चों के साथ प्यार और स्नेह का आदान-प्रदान करते हैं, तब बच्चे उनकी जरूरतों को समझने और उनका सम्मान करने में भी कुशल बनते हैं।
इसके अलावा, ऐसे क्षणों में संवाद कौशल के विकास में भी मदद मिलती है। बच्चे अपने माता-पिता की भाषा, भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ और सामाजिक संकेतों को समझते हैं, जिससे उनमें भावनात्मक बुद्धिमत्ता विकसित होती है। यह न केवल आज के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में उनके संबंधों को भी आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अगर हम आंकड़ों की बात करें, तो यह पुष्टि की गई है कि भावनात्मक निकटता और शारीरिक स्पर्श बच्चों के विकास के लिए अत्यधिक फायदेमंद हैं। वास्तव में, अध्ययन बताते हैं कि जिन बच्चों को नियमित रूप से प्यार और सुरक्षा का अनुभव मिलता है, वे उसके अभाव में रहने वाले बच्चों की तुलना में 50% अधिक संभावित हैं कि उनकी भावनात्मक समस्याएँ कम होंगी।
इसलिए, माँ और बच्चे के बीच का यह साधारण सा क्षण, जैविक व्यवहार के अंतर्गत केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि हमारे समाज एवं बच्चों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण सामर्थ्य है।