भेड़ों की सामजिक व्यवहार की रोचकता
भेड़ों के समूह में केवल घास का सेवन या ऊन का उत्पादन नहीं होता। उनकी सामाजिक संरचना और व्यवहार भी अत्यंत रोचक है। भेड़े जटिल सामाजिक संबंधों में लिपटी होती हैं, जहां हर भेड़ अपनी जगह और पहचान को समझती है। एक भेड़ के बारे में दिलचस्प बात यह है कि वे एक-दूसरे को पहचानने के लिए आवाज़, चेहरे की पहचान और यहाँ तक कि नाक की गंध का इस्तेमाल करती हैं।
जब भेड़ों का एक समूह मिलकर चल रहा होता है, तो उनकी सामूहिकता का स्वरूप देखने लायक होता है। ये भेड़ें न केवल अपने मालिक के प्रति वफादार होती हैं, बल्कि एक-दूसरे से भी गहरे जुड़ी रहती हैं। उनकी सामाजिक व्यवहार की अध्ययन से हमें यह भी पता चलता है कि जब एक भेड़ को डर लगता है, तो उसके साथी भेड़े बिना कुछ सोचे समझे उसका अनुसरण करने लगती हैं।
इस सामूहिक व्यवहार का एक विज्ञान है। भेड़ों में ग्रुप थिंकिंग की प्रवृत्ति होती है, जो सुरक्षा और अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। यह व्यवहार उन्हें शिकारियों से बचने में मदद करता है। यदि हम भेड़ों की ऊँचाई पर रुकें, तो यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि भेड़ों का दिमाग भी उनके आकार से कहीं अधिक कार्यशील होता है।
संख्यात्मक दृष्टि से देखें, तो एक समूह मेंषण भेड़ें 20 से 30 व्यक्तियों के बीच होती हैं, जिससे उनका समूह सुरक्षा और खुलापन दोनों का लाभ उठाए। यह जानकर आश्चर्य होता है कि स्तनधारी जीवों में सामाजिक संबंधों का विकास केवल मनुष्यों में सीमित नहीं है, बल्कि भेड़ों जैसे जंगली जीवों में भी यह एक महत्वपूर्ण भेद है।