सुरम्य पहाड़ों की गोद में, एक गिलहरी अपने पैर की अंगुलियों पर खड़ी है, जैसे किसी जिज्ञासु पर्यटक ने हसीन नज़ारों का मुआयना करने का सही समय पा लिया हो। इस गिलहरी का आत्मविश्वास और सजगता, जीव-जंतु विज्ञान का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसे देखना मन को
गिलहरियों के इस विशेष व्यवहार का मुख्य कारण उनकी सुरक्षा है। जब वे खड़ी होती हैं, तब उनका दृष्टिकोण विस्तारित होता है, जिससे वे आस-पास के खतरों को जल्दी पहचान सकें। यह विज्ञान से भरी एक आवश्यकता है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि वे जीवित रहने के लिए सही निर्णय ले सकें।
हालांकि, गिलहरी की यह शिष्टता सिर्फ सतर्कता नहीं बल्कि क्यूरेटिव भी है। जब वे अपने पर्यावरण को अवलोकन करती हैं, तब वे अपने समाज में बोली जाने वाली भाषाओं का भी उपयोग करती हैं। विभिन्न ध्वनि संकेतों के माध्यम से, वे खतरे का संदेश देती हैं या अपने साथी को बुलाती हैं। यह सामाजिक व्यवहार न केवल उनकी प्रजाति की समृद्धि में योगदान करता है, बल्कि अधिक जिज्ञासु और सामाजिक प्राणियों के विकास को भी दर्शाता है।
इस प्रकार, एक साधारण गिलहरी, अपने ध्यान और विश्लेषण के माध्यम से, जीवित रहने की रणनीतियों को उजागर करती है। वास्तव में, कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि गिलहरियां अपने पर्यावरण को लगभग 700 मीटर तक देख सकती हैं। यह संख्यात्मक आंकड़ा उन्हें अवसरों और खतरों को समान रूप से समझने में सक्षम बनाता है, और यही उनकी अद्वितीयता है।