पंडा के छोटे बच्चों का संसार
जब हम चीनी पंडों की बात करते हैं, तो उनकी अनोखी क्यूटनेस और शीतलता तो मन को भाती ही है, परंतु इनके व्यवहार में छिपे कई रोचक पहलुओं की चर्चा कम होती है। पंडा के शिशुओं में एक खासियत होती है कि जब वे मां के पास होते हैं, तो उनके व्यवहार में एक अद्भुत संयोजन देखने को मिलता है। ये छोटे निष्क्रिय प्राणी, हंसमुखता से परिपूर्ण होते हैं, जब वे एक-दूसरे के साथ खेलते हैं। उनके बीच की झगड़ालू प्रतियोगिताएं यह दर्शाती हैं कि उनका सामाजिक विकास अब शुरू हो चुका है।
पंडा शिशुओं का जीवन अनिवार्य रूप से मस्तिष्क विकास पर केंद्रित होता है। जन्म के समय ये सिर्फ 100 से 200 ग्राम के होते हैं, और अपने पहले कुछ महीनों में दिमागी विकास के लिए मां के दूध पर निर्भर रहते हैं। वे रोजाना एक किलोग्राम वजन बढ़ा भी सकते हैं। उनका खेल गतिविधियों से केवल शारीरिक विकास ही नहीं होता, बल्कि इससे मानसिक विकास में भी मदद मिलती है। छोटे पंडे अपनी मां और अन्य पंडों के साथ विभिन्न प्रकार के स्वाभाविक व्यवहार देखने को मिलते हैं, जो उनके सामाजिक कौशल को विकसित करने में सहायक होते हैं।
येबच्चे, अपने जीवन के पहले साल में, अपने परिवेश को समझने के लिए अपने इंद्रियों का पूरा इस्तेमाल करते हैं। यहां एक दिलचस्प तथ्य है: पंडा अपने जीवन में लगभग 40% समय सोने में बिताते हैं। यही वजह है कि उन्हें आराम पसंद होता है, और जब वे खेलते हैं, तो उसे थकावट से घर का आंगन समझते हैं।
इस प्रकार, पंडा के बच्चों के जीवन की विशेषताएं हमें यह सिखाती हैं कि विकास को केवल भौतिक आकार में नहीं, सुधार और मानसिक विकास में भी देखना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले 40 सालों में पंडा की प्रजाति की संख्या में 17% की वृद्धि हुई है। यह सिर्फ संरक्षण का परिणाम नहीं, बल्कि उनके असाधारण व्यवहार और सामाजिक विकास का भी प्रमाण है।