एक रहस्यमय वन में एक छोटा सा बच्चा, चारों ओर देखता हुआ, एक जिज्ञासा से भरी मुस्कान के साथ खड़ा है। छायादार पेड़ों और जंगली पौधों के बीच, उसकी आँखों में अनंत संभावनाओं का एक उजाला है। यह पल केवल एक छोटे बच्चे की जिज्ञासा नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक सामान्य
  बच्चों में जिज्ञासा की यह भावना केवल एक आनंददायक अनुभव नहीं है, बल्कि यह विकासात्मक मनोविज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अध्ययनों के अनुसार, बच्चे अपने पर्यावरण को जांचने में लगे रहते हैं, क्योंकि यह उनके संज्ञानात्मक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनकी आँखों के सामने खुलती हुई दुनिया, उन सभी तत्वों को जो वे नहीं जानते, उनकी समझ को बढ़ाती है और साथ ही में नई खोजों की संभावनाओं को जन्म...
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