जब बच्चे अपने खिलौनों के साथ खेलते हैं, तो वे वास्तविकता के अनुभव को समझने की प्रक्रिया में होते हैं। यह न केवल उनकी कल्पना को विकसित करता है, बल्कि कठिनाइयों के प्रति उनके संवेदनशीलता को भी बढ़ाता है। बच्चों का यह खिलौनों के साथ बातचीत करना एक प्रकार की 'सामाजिक प्रयोगशाला' है। यह उन्हें उन संदेशों को समर्पित करने में मदद करता है जो वे अपने आस-पास की दुनिया से प्राप्त करते हैं।
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