जब एक बच्चा अपनी छोटी-छोटी हरकतों से एक बार में न केवल मस्ती करता है, बल्कि माँ-बाप या दादा-दादी के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश करता है, तो इस क्षण में सांस्कृतिक और भावनात्मक सीखने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह जीवन के पहले वर्षों में सामाजिक बंधनों को मजबूत बनाने का एक तरीका है। जैसे-जैसे बच्चे बढ़ते हैं, वे अधिक जिज्ञासु बनते हैं, सवाल पूछते हैं और अपने अनुभवों के आधार पर दुनिया...