गर्मी की धूप से भरे एक ग्रीनहाउस में एक छोटी बच्ची पेड़-पौधों की दुनिया में खोई हुई है। उसकी आँखों में जिज्ञासा और एक विशेष गुण झलकता है: प्राकृतिक प्रवृत्तियों के प्रति एक स्वाभाविक आकर्षण। जैसे-जैसे वह पौधों की पत्तियों को छूती है, यह नहीं केवल उसके बचपन
  विज्ञान के नजरिए से देखा जाए, तो इस बंधन की गहराई एक अद्भुत व्यवहारिक पहलू को उजागर करती है। यूं तो हम हमेशा सोचते हैं कि पौधे मौन होते हैं, मगर वे भी अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं, जैसे कि प्रकाश की दिशा में झुकना या पानी की कमी पर पत्तियों को कसकर बंद करना। जब बच्ची अपने छोटे हाथों से उन्हें छूती है, तो उसे न केवल पौधों की बनावट का अनुभव होता है, बल्कि वह इस बात को भी समझती है कि उसके...
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