जब एक पेड़ अपने चारों ओर का वातावरण बदलता हुआ देखता है, तो वह खुद को एक अनवरत समायोजन के लिए तैयार करता है। उसकी शाखाएँ, नर्म और लचीली, बदलते मौसम की चुनौतियों का सामना करती हैं। यही गुण उसे प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ने की ताकत प्रदान करता है। सर्दियों में सूख जाना और गर्मियों में फिर से जी उठना, इस पेड़ की प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है।
इसके विपरीत, शहर की ऊँची इमारतें...